क्योंकि वैष्णव सबरूप मेरी जन्मदाती मेरी माँ मेरे घर पे है,
नहीं जाता मैं हरिद्वार कांवड़ लेने
क्योंकि शंकर सबरूप मेरे पिता मेरे घर पे हैं,
नहीं जाता मैं गुरूद्वारे इसके लिए भी मांगता माफ़ी मैं,
क्योंकि मेरे गुरु ने जो मंत्र दिया उसका सिमरन ही काफी है,
तेरे दर पे झुका हूँ देना हो तो इतना मान देना
कि श्रवण कुमार की तरह माँ बाप की सेवा कर पाऊं
बस यही वरदान देना
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