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20261019

रिश्ता जोड़िए, सौदा नहीं।

 30 पार की दुल्हन और 32 पार का दूल्हा - हम अपने ही बच्चों का घर क्यों नहीं बसने दे रहे?

मै उस दुर्लभ प्रजाति का संभवतः आखिरी इंसान हूं जो कि आज भी तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी ईमानदारी से और श्रमसाध्य सगाई संबध का प्रयास करता है। अन्यथा इस झंझट में आजकल कोई मध्यस्थता नहीं करते हैं ।

आज शाम अपने आसपास में नजर घुमाइए। आपको 28, 30, 32, 35 साल की कई लड़कियाँ और लड़के मिल जाएंगे जो पढ़े-लिखे हैं, नौकरी कर रहे हैं, देखने में ठीक हैं, पर शादी नहीं हुई है।

क्यों?

क्योंकि हमने शादी को शादी रहने ही नहीं दिया, हमने इसे एक डील बना दिया है।

पहले रिश्ता होता था, अब इंटरव्यू होता है।

पहले लड़की वाले पूछते थे - लड़का कमाता है? नशा-पत्ता तो नहीं करता? परिवार कैसा है?

आज लिस्ट बहुत लंबी है।

लड़के वालों के लिए - लड़की कितनी गोरी है? उसकी सैलरी कितनी है? खाना बनाना आता है या नहीं, पर नौकरी भी करनी चाहिए? ससुराल में रहेगी या अलग फ्लैट चाहिए? सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव तो नहीं?

लड़की वालों के लिए - लड़के का अपना घर है? कितने BHK का? कार कौन सी है? साल का पैकेज कितना है? विदेश जाने का प्लान है? सास-ससुर साथ रहेंगे क्या?  जमीन है?

हम जीवनसाथी नहीं ढूंढ रहे, हम Amazon पर प्रोडक्ट फिल्टर कर रहे हैं। हाइट इतनी हो, रंग ऐसा हो, पैकेज इतना हो, लोकेशन ये हो।

और जब फिल्टर इतने लगा दोगे तो रिजल्ट जीरो ही आएगा।

"और अच्छा मिलेगा" का जाल

यह सबसे खतरनाक बीमारी है।

एक अच्छा रिश्ता आया। लड़का सभ्य है, परिवार इज्जतदार है। पर मन में लालच आया - "इससे भी अच्छा मिल सकता है।"

उसे ठुकरा दिया। दूसरा आया, उसे भी ठुकरा दिया - "थोड़ा और देख लेते हैं।"

इसी "और देख लेते हैं" में 3 से 4 साल निकल जाते हैं। जब तक आँख खुलती है, तब तक उम्र 31-32 हो चुकी होती है।

अब जो रिश्ते आ रहे हैं, वे पहले से कमतर लगते हैं। घबराहट में फिर गलत फैसला हो जाता है, या फिर इंतजार और लंबा हो जाता है।

जिंदगी कोई सरकारी टेंडर नहीं है कि सबसे ऊँची बोली का इंतजार किया जाए। शादी एक समय पर लिया गया सही फैसला है।

पैसे का घमंड और सुख की गलत परिभाषा

हम सब चाहते हैं कि हमारी बेटी राज करे, हमारा बेटा ऐश करे। पर राज क्या सिर्फ बड़े घर और बड़ी गाड़ी में होता है?

एक बड़ा घर है, पर घर में रोज झगड़ा है, तो वो घर है या जेल?

एक छोटा घर है, पर पति-पत्नी में प्यार है, एक-दूसरे की इज्जत है, तो वही स्वर्ग है।

आज पैसा है, कल और आ जाएगा। पर एक अच्छा, जिम्मेदार, इज्जत करने वाला इंसान किस्मत से मिलता है। हमने किस्मत को लात मारकर पैसों के पीछे भागना शुरू कर दिया है।

और सच कहूं तो, आज की लड़कियां खुद इतना कमा रही हैं कि उन्हें किसी के पैसे की जरूरत नहीं। उन्हें एक साथी की जरूरत है। और लड़कों को भी नौकरानी नहीं, एक समझदार साथी की जरूरत है।

उम्र किसी के लिए नहीं रुकती

यह बात कोई नहीं बताता, पर यह सच है।

30 के बाद रिश्ते मिलना मुश्किल हो जाता है। यह लड़का-लड़की दोनों के लिए सच है।

शरीर, सोच, जिम्मेदारियां - सब बदलती हैं। 25 साल में जो एडजस्टमेंट आसान लगता है, वो 33 में मुश्किल लगता है।

हम आधुनिक बनने के चक्कर में एक प्राकृतिक समय को ही टाल रहे हैं। करियर जरूरी है, पर करियर के साथ-साथ परिवार भी तो जरूरी है।

रात को 11 बजे ऑफिस से आकर एक बड़े खाली फ्लैट में अकेले मैगी खाने से अच्छा है, एक छोटे घर में दो लोग साथ में दाल-चावल खा लें।

अंत में एक ही बात

अपने बच्चों को इतना मत परखिए कि वे बिकने वाली चीज लगें।

रिश्ता जोड़िए, सौदा नहीं।

अगर लड़का मेहनती है, नशा नहीं करता, परिवार की इज्जत करता है - तो हाँ कर दीजिए।

अगर लड़की सुशील है, समझदार है, परिवार को जोड़कर रख सकती है - तो हाँ कर दीजिए।

परफेक्ट कोई नहीं होता। शादी के बाद दो लोग एक-दूसरे को परफेक्ट बनाते हैं।

वक्त रहते आँखें खोल लीजिए, वरना कल को आपके घर में 35 साल की बेटी या 38 साल का बेटा होगा, जिसके पास सब कुछ होगा - पैसा, गाड़ी, प्रमोशन - पर एक अपना परिवार नहीं होगा।

सोचिएगा जरूर।