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20101216

राम रतन धन पायो


पायो जी मैने राम रतन धन पायो ।
वस्तु अमोलक दई मेरे सतगुरु,  कर किरपा अपनायो ॥
पायो जी मैने राम रतन धन पायो 
जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
पायो जी मैने राम रतन धन पायो 
खरचै नहिं कोई, चोर न लेवै, दिन-दिन बढत सवायो।
पायो जी मैने राम रतन धन पायो
सत की नाव खेवहिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।

पायो जी मैने राम रतन धन पायो
मीरा के प्रभु गिरधरनागर, हरख-हरख जस पायो॥

पायो जी मैने राम रतन धन पायो 

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